यमुनानगर। पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव कुमारी शैलजा ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह फैसला पहले ही लिया जाना चाहिए था। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि केंद्र सरकार समय रहते विपक्ष की मांगों पर ध्यान देती, तो लाखों छात्रों को सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करने की नौबत नहीं आती।
यमुनानगर में मीडिया से बातचीत के दौरान कुमारी शैलजा ने कहा कि शुरुआत में सरकार का रुख था कि वह किसी भी हाल में पीछे नहीं हटेगी, लेकिन आखिरकार उसे अपना निर्णय बदलना पड़ा। उन्होंने कहा कि सरकार को छात्रों के भविष्य को प्राथमिकता देनी चाहिए थी।
पेपर लीक के मामलों पर कांग्रेस महासचिव ने कहा कि यह समस्या अब किसी एक राज्य तक सीमित नहीं रही है। उन्होंने दावा किया कि हाल ही में उत्तराखंड सहित कई राज्यों में प्रश्नपत्र लीक के मामले सामने आए हैं, जिससे युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है। उनके अनुसार, लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों से स्पष्ट है कि परीक्षा व्यवस्था में गंभीर खामियां हैं।
उन्होंने नई शिक्षा नीति और परीक्षा प्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यदि पेपर लीक मामलों में करोड़ों रुपये के जुर्माने का प्रावधान किया जा रहा है, तो इससे यह संकेत मिलता है कि इस तरह के अपराध बड़े स्तर पर हो रहे हैं। उन्होंने परीक्षा घोटालों के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुए कथित लाठीचार्ज की निष्पक्ष जांच कराने की भी मांग की।
किसानों के मुद्दे पर कुमारी शैलजा ने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को कानूनी दर्जा देने, व्यापार समझौतों और अन्य लंबित मांगों को लेकर किसान लंबे समय से परेशान हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार किसानों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय विदेशी हितों को प्राथमिकता दे रही है।
हरियाणा के पांच कांग्रेस विधायकों के निलंबन से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि इस विषय पर पार्टी स्तर पर चर्चा होगी और उसके बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी।







