चंडीगढ़ | हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी प्रशासनिक सचिवों के कामकाज से नाखुश हैं। सरकार में चल रही कैबिनेट तैयारियों को लेकर सीएम ने नाराजगी जाहिर की है क्योंकि कैबिनेट ब्रांच को समय पर मेमोरेंडम नहीं भेजे जा रहे हैं। इसके चलते मंत्रियों को दस्तावेज़ों का अध्ययन करने में दिक्कत हो रही है और अंतिम समय में एजेंडा तैयार करना चुनौती बन रहा है।
मुख्यमंत्री की नाराजगी के बाद कैबिनेट ब्रांच की ओर से प्रशासकीय सचिवों के लिए निर्देश जारी किए गए हैं। कैबिनेट शाखा के अधीक्षक द्वारा तीन मुख्य बिंदुओं में यह साफ किया गया है कि अब लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
ये हैं निर्देशों के मुख्य बिंदु:
- समय पर मेमोरेंडम न भेजना समस्या: कई बार सचिवों द्वारा कैबिनेट ब्रांच को अंतिम समय में मेमोरेंडम भेजा जाता है और आग्रह किया जाता है कि उन्हें एजेंडे में शामिल किया जाए। इससे मंत्रियों को समय पर दस्तावेज़ पढ़ने का मौका नहीं मिल पाता।
- पूर्व निर्देशों की अनदेखी: पहले भी कैबिनेट ब्रांच की ओर से यह स्पष्ट किया जा चुका है कि मंत्रिपरिषद की बैठक से कम से कम 72 घंटे पहले मेमोरेंडम कैबिनेट ब्रांच को भेजा जाना चाहिए और 48 घंटे पहले मंत्रियों, मुख्य सचिव और राज्यपाल को भी भेजा जाना अनिवार्य है।
- सख्त चेतावनी: अब स्पष्ट कर दिया गया है कि बैठक से 72 घंटे पहले यदि कोई ज्ञापन नहीं भेजा गया, तो उसे कैबिनेट बैठक के एजेंडे में शामिल नहीं किया जाएगा।
इस नए आदेश से साफ है कि मुख्यमंत्री नायब सैनी की सरकार प्रशासनिक प्रक्रियाओं में अनावश्यक देरी और लापरवाही को लेकर सख्त रवैया अपना रही है।







