Karnal,07 April- बदलती जीवन शैली ने आहार में बड़ा परिवर्तन किया है। इससे भले ही कुछ ऊपरी फायदे दिखाई दे रहे हों मगर सच यह है कि खानपान की इन आदतों ने कई स्तरों पर स्वास्थ्य को प्रभावित किया है।आज युवाओं में तेजी से अस्थमा यानी दमा रोग जड़ें फैला रहा है। चिकित्सक इसकी बड़ी वजह आहार में पोषक तत्त्वों की कमी और तले-भुने भोजन, स्नैक्स और चिकनाईयुक्त भोजन को बता रहे हैं। इस तरह का आहार स्वास्थ्य के लिए बेहतर साबित होने की बजाय उस पर विपरीत प्रभाव डालता है। इसके अलावा शहरी क्षेत्रों में वाहन प्रदूषण और ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी-बड़ी मिल, कारखाने सांस संबंधी रोगों को बढ़ावा दे रहे हैं। अगर महिलाओं की समस्याओं पर भी गौर करें तो कहीं न कहीं इनके बढ़ने का कारण भी आहार संबंधी त्रुटियां ही हैं।
फसलों की गुणवत्ता बढाने में जुटा संस्थान:
वहीं मोटे अनाज के गुणवत्ता को देखते हुए देश भर के कृषि संस्थानो में मोटे अनाज के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न कार्यक्रम किये जा रहे है। लोगो पोष्टिक से पूर्ण उत्पाद मिल सके। इसके लिए राष्ट्रीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान करनाल के विशेषज्ञ फसलों में परिवर्तन कर उसकी गुणवत्ता बढाने में जुटे हुए है।संस्थान में कृषि विशेषज्ञ फसलों में परिवर्तन के लिए किसानों को शिक्षित कर उन्हें अपनी आय को बढ़ाने के गुर भी सीखा रहे है।
संस्थान के निदेशक डॉ. रत्तन तिवारी ने बताया कि लगातार मौसम में हो रहे परिवर्तन और लोगो की जीवन शैली में खानपान का बड़ा बदलाव उन्हें गंभीर बीमारियों की तरफ ले जा रहा है।इसी गंभीरता पूर्ण चुनौती को स्वीकारते हुए संस्थान के विशेषज्ञ फसल परिवर्तन पर काम कर रहे है तांकि लोगो को स्वास्थ्य वर्धक एवं स्वास्थ्य पूर्ण उत्पाद मिल सके।
नई तकनीक व सयन्त्रित आधारित खेती की तरफ बढ़ रही नोजवान पीढ़ी:
डॉ.रत्तन तिवारी ने बताया कि आजकल की नोजवान पीढ़ी को खेती करने के लिए नई पद्धति चाहिये। युवा पीढ़ी नई तकनीक व सयन्त्रित आधारित खेती की तरफ बढ़ रही है।उसमें ज्यादा से ज्यादा तकनीक और सयन्त्रित खेती करने का समावेश चाहिए। सयन्त्रित आधारित खेती कैसे हो इस पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। जैसे ड्रोन के जरिये खेतो में दवाइयों का छिड़काव किया जा रहा है,जैसे घर बैठे मोबाइल के जरिये स्विच ऑन कर खेतो की सिंचाई कर देना।आने वाले समय मे इस प्रकार बहुत सारी तकनीक सामने आ रही है।
लागत कम और उपज ज्यादा के फार्मूले को किसान अलग अलग फसल पद्धति से अपना रहे:
अपनी आय को बढाने के लिए किसान अब यह चाहता है एक या दो फसल के बीच मे अन्य ओर कोई भी फसल लगाई जाए।इसमें उनके साथ संस्थान के वैज्ञानिक भी अपना पूर्ण योगदान देने के लिए तैयार हैं। संस्थान द्वारा किसानों को फसलों की प्रजातियों को वर्गीकृत करके दी जाएगा और उन्हें बताया जाए कि इन अलग प्रजातियों कौन सा उत्पाद बढ़िया बनता है जिससे लोगो को अच्छे उत्पाद का अच्छा आहार मिलेगा, उसकी मांग बढ़ेगी जिससे किसानों की लागत और खर्च में कमी आएगी साथ ही उनकी आय भी बढ़ेगी। उन्हीने बताया कि आने वाले समय मे भारत मूल्य संवर्धन में बहुत बड़ी पहचान बनाएगा।







