सिरसा, 21 अगस्त : सर्वोच्च न्यायालय में आरक्षण में उप-वर्गीकरण एवं क्रीमीलेयर लागू करने के आदेश को तत्काल अध्यादेश लाकर समाप्त करने की मांग को लेकर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति वर्ग द्वारा शहर में रोष मार्च निकाला गया। काफी संख्या में बहुजन समाज के लोग शहर के सुर्खाब चौक पर एकत्रित हुए और रोष मार्च निकालते हुए लघु सचिवालय पहुंचे, जहां जिला प्रशासन के नाम ज्ञापन सौंपा गया।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि एससी एसटी वर्गों के आरक्षण में उपवर्गीकरण करने एवं क्रिमिलियर लगाने संबंधी आदेश दिया था जिससे एससी व एसटी वर्ग के करोड़ो लोगों के संवैधानिक अधिकार खतरे में पड़ गए है। सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़ेपन के लिए आरक्षण (प्रतिनिधित्व) देने की व्यवस्था की गई है, न कि आर्थिक आधार पर। इन वर्गों के आरक्षण में क्रिमिलियर लगाने एवं उपवर्गीकरण करने का अधिकार राज्य सरकारों को दे दिया है जबकि अनुच्छेद 341 एवं 342 के तहत किसी जाति उपजाति को एससी एसटी वर्ग की सूची में जोडक़र आरक्षण के दायरे में लाने या आरक्षण के दायरे से बाहर करने का अधिकार महामहिम राष्ट्रपति, केंद्र सरकार को है, न कि राज्य सरकार को। बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने सरकार को अध्यादेश लाने एवं स्पेशल संसद सत्र बुलाकर न्यायालय के उक्त आदेश को निष्प्रभावी बनाने के लिए बिल पास कर आरक्षण विषय को संविधान की 9वीं अनुसूची में डालने को कहा था।
बसपा जिलाध्यक्ष भूषण लाल बरोड, एडवोकेट रविंद्र बाल्याण ने कहा कि देश में एससी एसटी वर्गों के साथ 75 वर्ष की आजादी के बाद आज भी जातीय आधार पर अत्याचार एवं भेदभाव होता है जो किसी से छुपा नहीं है। सरकार की इन वर्गों के प्रति अच्छी नियत नहीं होने से करोड़ों पद बैंक लोग के खाली है। जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए मांग जताई गई कि माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा 1 अगस्त 2024 को आरक्षण के संबंध में दिए गए निर्णय को निष्प्रभावी बनाने के लिए अध्यादेश जारी किया जाये या विशेष संसद सत्र बुलाकर बिल पास करके आरक्षण विषय को संविधान की 9वीं अनुसूची में डाला जाये।







