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ट्रैक्टर मार्च का असर पलवल में भी…भाकियू के राष्ट्रीय सचिव रतन सिंह सोरोत ने की प्रेस वार्ता

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पलवल : चन्द्रिका ( TSN)- संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर देश भर में निकाले गए ट्रैक्टर मार्च का असर पलवल में भी देखने को मिला। ट्रैक्टर मार्च का नेतृत्व भारतीय किसान यूनियन (टिकेट) के राष्ट्रीय सचिव रत्न सिंह सौरोत ने किया। प्रेसवार्ता के माध्यम से ट्रैक्टर मार्च में शामिल किसानों का धन्यावाद करते हुए रत्न सिंह सोरोत ने कहा की अन्नदाता अपनी मांगों को मनवाकर ही दम लेगा और दिल्ली में अपनी आवाज बुलंद करेगा।
इस बार भी सरकार को झुकना होगा और किसानों की मांग माननी होंगी
प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए भाकियू के राष्ट्रीय सचिव रतन सिंह सोरोत ने कहा की सरकार ने किसानों के 13 महीने चले पहले किसान आंदोलन में जो वादे किए थे उन्हें पूरा नहीं किया गया। इसलिए किसान मजबूरन आंदोलन कर रहा है सरकार को अपने वादे को निभाते हुए किसानों की मांगों को पूरा करना चाहिए। उन्होंने कहा किसानों की मांग है की एमएसपी पर कानून बने, किसान आंदोलन पार्ट वन के दौरान किसानों पर दर्ज हुए मुकदमों को रद्द किया जाए, लखीमपुर खीरी के किसानों को न्याय दिया जाए, किसान आंदोलन में जान गवाने वाले किसानों को शहीद का दर्जा दिया जाए और पराली पर बने कानून से किसानों को अलग रखा जाए। उन्होंने कहा की अगर सरकार ने किसानों की मांगे नहीं मानी तो चाहे कितना ही लम्बा आंदोलन करना पड़े किसान उससे पीछे नहीं हटेंगे। भाकियू के राष्ट्रीय सचिव रतन सिंह सोरोत ने  कहा कि  14 मार्च को संयुक्त किसान मोर्चे के आह्वान पर दिल्ली के रामलीला मैदान में बुलाई गई महापंचायत में पलवल के भी हजारों किसान हिस्सा लेंगे। उन्होंने कहा की पिछले किसान आंदोलन के दौरान भी सरकार को किसानों के सामने झुकना पड़ा था और इस बार भी सरकार को झुकना होगा और किसानों की मांग माननी होंगी।
 रत्न सिंह ने कहा की सरकार कहती है किसान विपक्षी राजनैतिक दलों की शह पर आंदोलन कर रहें हैं. अगर उन्हें ऐसा लगता है तो सरकार को तुरंत किसानों की मांगों को पूरा कर आंदोलन को खत्म करवाना चाहिए। उन्होंने कहा कि  29 फरवरी को संयुक्त किसान मोर्चे की बैठक होनी है. इस बैठक में संयुक्त किसान मोर्चे की तरफ से जो भी निर्देश आएगा पलवल के किसान और सभी किसान संगठन उसको अमलीजामा पहनाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने कहा की किसान कभी संघर्ष से कभी पीछे नहीं हटता इसलिए सरकार को चाहिए कि किसानों की मांगों को तुरंत प्रभाव से मानना चाहिए अन्यथा आंदोलन बड़ा स्वरूप ले सकता है, जिसकी जिम्मेदारी खुद सरकार की होगी। इस दौरान किसान नेता रत्न सिंह सोरोत के अलावा समंदर सिंह चौहान, मूलचंद बडगुजर, करतार मंढनाका, ऋषिपाल चौहान, राहुल तंवर और होशियार सरपंच सहित तमाम किसान नेता मौजूद थे।

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