Home Haryana हरियाणा में खाद की जमाखोरी और कालाबाजारी पर सख्ती: चार माह में...

हरियाणा में खाद की जमाखोरी और कालाबाजारी पर सख्ती: चार माह में 494 छापे, 50 लाइसेंस रद्द

42
0

चंडीगढ़। हरियाणा में खाद की जमाखोरी, कालाबाजारी और घटिया गुणवत्ता वाले उर्वरकों के कारोबार पर सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है। पिछले चार महीनों में राज्यभर में 494 स्थानों पर छापेमारी कर नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई। इस दौरान 50 उर्वरक विक्रेताओं के लाइसेंस निलंबित या रद्द किए गए, जबकि 42 दुकानदारों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए और 8 मामलों में एफआईआर दर्ज की गई। यह जानकारी केंद्र सरकार ने संसद के मानसून सत्र के दौरान साझा की।

आंकड़ों के अनुसार 1 अप्रैल से 24 जुलाई 2026 के बीच खाद वितरण और बिक्री व्यवस्था की निगरानी के लिए व्यापक अभियान चलाया गया। सबसे ज्यादा कार्रवाई जमाखोरी के मामलों में हुई। इस श्रेणी में 22 कारण बताओ नोटिस जारी किए गए, 31 लाइसेंस निलंबित या रद्द किए गए और 6 एफआईआर दर्ज की गईं।

खाद की कालाबाजारी से जुड़े मामलों में 8 विक्रेताओं को नोटिस जारी किए गए और 7 लाइसेंसों पर कार्रवाई की गई। हालांकि इस श्रेणी में कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई। वहीं घटिया गुणवत्ता वाले उर्वरकों की बिक्री के मामलों में 9 नोटिस जारी किए गए और 6 लाइसेंस रद्द या निलंबित किए गए।

इसके अलावा उर्वरकों के डायवर्जन यानी निर्धारित उपयोग या क्षेत्र से हटाकर दूसरी जगह भेजने के मामलों में भी कार्रवाई की गई। इस श्रेणी में 3 कारण बताओ नोटिस जारी किए गए, 6 लाइसेंस रद्द या निलंबित किए गए और 2 एफआईआर दर्ज की गईं। अधिकारियों के अनुसार कार्रवाई के दौरान किसी भी स्थान से खाद की खेप जब्त नहीं हुई।

किसानों के लिए पर्याप्त खाद उपलब्ध होने का दावा

केंद्र सरकार ने दावा किया है कि वर्ष 2025-26 के दौरान हरियाणा में किसानों की जरूरत के मुकाबले पर्याप्त मात्रा में उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई। सरकार के मुताबिक राज्य में यूरिया की अनुमानित आवश्यकता 21.67 लाख मीट्रिक टन थी, जबकि 26.08 लाख मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध कराया गया। इस अवधि में 23.20 लाख मीट्रिक टन यूरिया की बिक्री दर्ज की गई।

इसी प्रकार डीएपी (डाय-अमोनियम फॉस्फेट) की मांग 5.53 लाख मीट्रिक टन आंकी गई थी, जबकि 6.10 लाख मीट्रिक टन उपलब्ध कराया गया। वहीं एमओपी (म्यूरेट ऑफ पोटाश) की 0.58 लाख मीट्रिक टन आवश्यकता के मुकाबले 0.67 लाख मीट्रिक टन की आपूर्ति की गई।

सरकार के अनुसार उर्वरकों की मांग और आपूर्ति का आकलन प्रत्येक सीजन से पहले किया जाता है। राज्यों को जरूरत के अनुसार खाद आवंटित की जाती है और पूरे वितरण तंत्र की ऑनलाइन निगरानी रखी जाती है, ताकि किसानों को समय पर पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध हो सके।

पीओएस मशीन से होती है खाद की बिक्री

सरकार ने बताया कि किसानों को आधार प्रमाणीकरण के बाद पॉइंट ऑफ सेल (पीओएस) मशीनों के माध्यम से खाद उपलब्ध कराई जाती है। बिक्री के आधार पर कंपनियों को सब्सिडी का भुगतान किया जाता है। इसके साथ ही उर्वरक वितरण नेटवर्क को भी लगातार मजबूत किया जा रहा है।

30 जुलाई 2026 तक हरियाणा में 8,219 सक्रिय उर्वरक खुदरा विक्रेताओं में से 4,601 केंद्रों को प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र के रूप में विकसित किया जा चुका है। इसके अलावा किसानों को उर्वरकों और कीटनाशकों के सुरक्षित उपयोग के लिए प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। सरकार का दावा है कि इन उपायों से खाद की उपलब्धता बेहतर हुई है और कालाबाजारी पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में मदद मिली है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here