अंबाला। अंबाला छावनी की बहुचर्चित 1065 एकड़ एक्साइज्ड भूमि को फ्रीहोल्ड करने संबंधी प्रस्ताव हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में चर्चा के लिए पहुंचा, लेकिन परिवहन एवं ऊर्जा मंत्री तथा अंबाला छावनी के विधायक अनिल विज की आपत्तियों के बाद इसे मंजूरी नहीं मिल सकी। विज ने प्रस्तावित नीति के तहत हजारों परिवारों पर संभावित आर्थिक बोझ पड़ने की आशंका जताते हुए इसके व्यापक पुनरीक्षण की मांग की।
मंत्रिमंडल की बैठक में विज ने स्पष्ट किया कि फ्रीहोल्ड नीति का उद्देश्य लोगों को मालिकाना हक देना है, लेकिन यदि इसके तहत निर्धारित शुल्क और शर्तें आम नागरिकों के लिए बोझ बनती हैं तो नीति के मूल उद्देश्य पर ही सवाल खड़े हो जाएंगे। उन्होंने सुझाव दिया कि नीति तैयार करने वाले अधिकारियों, मुख्यमंत्री और संबंधित पक्षों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाए। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी इस सुझाव से सहमति जताई, जिसके चलते फिलहाल प्रस्ताव को स्वीकृति नहीं दी गई।
अंबाला छावनी की 1065 एकड़ एक्साइज्ड भूमि का मामला कई दशकों से लंबित है। वर्ष 1977 में इस क्षेत्र को कैंटोनमेंट बोर्ड के अधिकार क्षेत्र से हटाकर नगर परिषद के अधीन कर दिया गया था। इस भूमि पर हजारों परिवार निवास कर रहे हैं और कई सरकारी कार्यालय भी स्थापित हैं, लेकिन आज तक अधिकांश लोगों को जमीन का पूर्ण मालिकाना हक नहीं मिल पाया है। लोगों के पास संपत्तियों की रजिस्ट्रियां होने के बावजूद जमीन का स्वामित्व सरकार के पास ही दर्ज है।
फ्रीहोल्ड की मांग लंबे समय से उठती रही है ताकि लोगों को उनकी संपत्तियों पर कानूनी मालिकाना अधिकार मिल सके। हालांकि अतीत में भी इस दिशा में प्रयास हुए, लेकिन अधिक शुल्क और कलेक्टर रेट को लेकर विवाद के कारण नीति लागू नहीं हो सकी। कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में भी ऐसा प्रस्ताव मंत्रिमंडल तक पहुंचा था, लेकिन लोगों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ने की आशंका के चलते उसे लागू नहीं किया गया।
सूत्रों के अनुसार वर्तमान प्रस्ताव में भी कलेक्टर रेट, शुल्क निर्धारण, पेनल्टी और अन्य तकनीकी प्रावधानों को लेकर कई सवाल उठाए गए हैं। अनिल विज का कहना है कि नीति ऐसी होनी चाहिए जिससे अधिकतम लोगों को लाभ मिले और किसी भी वर्ग पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव न पड़े। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि फ्रीहोल्ड का लाभ केवल सीमित लोगों तक न सिमटकर छावनी क्षेत्र के सभी पात्र परिवारों तक पहुंचे।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय, शहरी स्थानीय निकाय विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और मंत्री अनिल विज की संयुक्त बैठक बुलाकर प्रस्ताव का पुनरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। बैठक में नीति के सभी पहलुओं का अध्ययन किया जाएगा और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जनता के हितों से कोई समझौता न हो।
गौरतलब है कि अंबाला छावनी के अधिकारों और हितों से जुड़े मुद्दों पर अनिल विज पहले भी मुखर रहे हैं। दुकानों के किरायेदारों को मालिकाना हक देने की नीति में अंबाला छावनी को शामिल न किए जाने पर भी उन्होंने विरोध दर्ज कराया था, जिसके बाद सरकार ने छावनी क्षेत्र को भी उस योजना का लाभ दिया था। अब फ्रीहोल्ड नीति को लेकर भी विज का रुख यही है कि कोई भी निर्णय जनता के हित और सुविधा को ध्यान में रखकर ही लिया जाए।







