करनाल,राकेश कुमार शर्मा-:करनाल जिले के शेखुपुरा मंचूरी गांव में उस समय शोक की लहर दौड़ गई,जब अमेरिका के कैलिफोर्निया से दिवंगत युवक सुपनदीप सिंह का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव पहुंचा।जैसे ही एंबुलेंस गांव में दाखिल हुई, परिजनों का दुख छलक पड़ा और पूरे गांव का माहौल गमगीन हो गया।मां,बहनों और अन्य रिश्तेदारों का रो-रोकर बुरा हाल था। गांव के लोगों ने भी नम आंखों से सुपनदीप को अंतिम विदाई दी।
सुपनदीप सिंह की कुछ दिन पहले अमेरिका के कैलिफोर्निया में अचानक मौत हो गई थी।इस दुखद घटना के बाद परिवार के सामने सबसे बड़ी चुनौती उनके पार्थिव शरीर को भारत लाने की थी।परिवार की आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों को देखते हुए गांव के लोगों,सामाजिक संगठनों तथा विदेश में रह रहे प्रवासी भारतीयों ने आगे आकर हर संभव सहयोग किया। सभी के संयुक्त प्रयासों से सुपनदीप का पार्थिव शरीर भारत लाया जा सका,जिससे परिवार अपने बेटे का अंतिम दर्शन कर सका।पार्थिव शरीर के गांव पहुंचते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण अंतिम श्रद्धांजलि देने के लिए एकत्र हो गए।अंतिम यात्रा में सैकड़ों लोगों ने भाग लिया और परिवार के दुख में अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं।पूरे गांव में शोक का माहौल रहा और धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ सुपनदीप का अंतिम संस्कार किया गया।
ग्रामीणों के अनुसार,सुपनदीप अपने परिवार का सबसे बड़ा सहारा था।उनके पिता का पहले ही निधन हो चुका था,जिसके बाद परिवार की जिम्मेदारी काफी हद तक सुपनदीप के कंधों पर आ गई थी।12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह बेहतर भविष्य की तलाश में पहले कनाडा गया और बाद में अमेरिका पहुंच गया।परिवार को उससे कई उम्मीदें थीं,लेकिन अचानक आई उसकी मौत की खबर ने सभी को गहरे सदमे में डाल दिया।परिजनों ने बताया कि सुपनदीप की मां की सबसे बड़ी इच्छा अपने बेटे का अंतिम बार चेहरा देखने की थी।उनका कहना था कि बेटे का अंतिम संस्कार गांव में पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार हो,ताकि परिवार उसे सम्मानपूर्वक अंतिम विदाई दे सके। समाज और प्रवासी भारतीयों के सहयोग से यह इच्छा पूरी हो सकी।







