गुरुग्राम। मानसून के दौरान जलभराव की समस्या से राहत दिलाने के लिए गुरुग्राम प्रशासन ने ड्रेनेज परियोजनाओं की रफ्तार तेज कर दी है। शहर में वर्षा जल निकासी व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से चल रहे कार्यों की समीक्षा करते हुए गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पी.सी. मीणा ने विभिन्न परियोजनाओं का निरीक्षण किया और अधिकारियों को तय समयसीमा के भीतर सभी कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान सीईओ ने वाटिका चौक से राष्ट्रीय राजमार्ग-48 के समानांतर विकसित की जा रही करीब 4.5 किलोमीटर लंबी लेग-4 ड्रेन का जायजा लिया। अधिकारियों के अनुसार इस महत्वपूर्ण परियोजना का लगभग 95 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और अब केवल करीब 120 मीटर का हिस्सा शेष है, जिसे 15 जून तक पूरा कर लिया जाएगा।
करीब नौ मीटर चौड़ी और तीन मीटर गहरी यह ड्रेन 1400 क्यूसेक पानी वहन करने की क्षमता रखती है। इसके शुरू होने के बाद बादशाहपुर ड्रेन (लेग-3) पर पड़ने वाला दबाव काफी हद तक कम होगा। साथ ही अतिरिक्त वर्षा जल को आवश्यकता अनुसार लेग-4 की ओर मोड़कर जल निकासी को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। इससे जलभराव प्रभावित क्षेत्रों में पानी की निकासी तेज होगी और बरसात के दौरान राहत मिलने की उम्मीद है।
सीईओ ने ताऊ देवीलाल स्टेडियम के समीप निर्माणाधीन ड्रेन का भी निरीक्षण किया। अधिकारियों ने बताया कि यह परियोजना भी जून के मध्य तक पूरी हो जाएगी। इसके चालू होने से मेदांता अस्पताल रोड, आसपास के अंडरपास और सेक्टर-32 क्षेत्र में जलभराव की समस्या में उल्लेखनीय कमी आने की संभावना है।
नरसिंहपुर क्षेत्र में चल रहे जल निकासी कार्यों की समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने बताया कि नई ड्रेन के माध्यम से राष्ट्रीय राजमार्ग के आसपास जमा होने वाले वर्षा जल को सीधे लेग-3 ड्रेन तक पहुंचाया जाएगा। इससे पानी को हीरो होंडा चौक की ओर मोड़ने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और जल निकासी व्यवस्था अधिक सुगम बनेगी।
इसके अलावा सेक्टर-37डी में लेग-3 और लेग-4 मास्टर ड्रेनों को मानेसर ड्रेन से जोड़ने के कार्यों का भी निरीक्षण किया गया। अधिकारियों को मानसून से पहले यह कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए। वहीं सेंट्रल पेरिफेरल रोड (सीपीआर) के साथ बने 6.5 किलोमीटर लंबे आरसीसी बॉक्स ड्रेन की डी-सिल्टिंग की भी समीक्षा की गई। यह ड्रेन बरसाती पानी को नजफगढ़ ड्रेन तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएगा और एसपीआर व द्वारका एक्सप्रेसवे के आसपास जलभराव की समस्या को कम करेगा।
जीएमडीए ने सभी ड्रेनों की सफाई, एंड-टू-एंड कनेक्टिविटी और निर्बाध जल प्रवाह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि मानसून के दौरान शहरवासियों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।







