अंकुर कपूर,अंबाला। नौतपा के दौरान पड़ रही भीषण गर्मी में लोग राहत के लिए ठंडे पेय पदार्थों का सहारा ले रहे हैं, लेकिन यही राहत स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा भी बन सकती है। स्वास्थ्य विभाग ने बाजार में इस्तेमाल हो रही बर्फ को लेकर लोगों और व्यापारियों को सतर्क किया है। विभाग का कहना है कि कई स्थानों पर पेय पदार्थों में ऐसी बर्फ का उपयोग किया जा रहा है, जो मानव उपभोग के लिए सुरक्षित नहीं होती और इससे कई संक्रामक बीमारियां फैलने का खतरा बना रहता है।
गर्मी बढ़ने के साथ ही जूस, शिकंजी, कोल्ड ड्रिंक और अन्य ठंडे पेय पदार्थों की मांग में तेजी आई है। सड़क किनारे लगने वाले स्टॉलों और दुकानों पर बड़ी मात्रा में बर्फ का इस्तेमाल किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार बाजार में उपलब्ध कुछ बर्फ केवल खाद्य सामग्री को ठंडा रखने के उद्देश्य से तैयार की जाती है, न कि सीधे सेवन के लिए।
स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सक डॉ. सुनील हरि ने बताया कि ऐसी बर्फ को पेय पदार्थों में मिलाकर परोसना लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ है। दूषित बर्फ के सेवन से पीलिया, टाइफाइड, दस्त, पेट संक्रमण और अन्य जलजनित बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। विशेष रूप से गर्मी के मौसम में इन बीमारियों के मामले तेजी से बढ़ सकते हैं।
विभाग ने बताया कि बढ़ती गर्मी के बीच पेयजल की मांग को देखते हुए पानी के कैंपर और सप्लाई करने वाले विक्रेताओं की जांच भी तेज कर दी गई है। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि लोगों तक पहुंचने वाला पानी पूरी तरह शुद्ध, फिल्टर और स्वास्थ्य मानकों के अनुरूप हो।
स्वास्थ्य विभाग ने व्यापारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि बाहर से लाई गई बर्फ का उपयोग केवल वस्तुओं को ठंडा रखने के लिए करें। उसे सीधे जूस, शिकंजी या अन्य पेय पदार्थों में मिलाकर ग्राहकों को न परोसा जाए। साथ ही पानी विक्रेताओं को भी सरकारी दिशा-निर्देशों और स्वास्थ्य मानकों का पालन करने के निर्देश जारी किए गए हैं।
विभाग ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वे गर्मी के मौसम में स्वच्छ पेयजल और प्रमाणित स्रोतों से तैयार किए गए पेय पदार्थों का ही सेवन करें, ताकि मौसमी बीमारियों से बचाव किया जा सके।







