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प्री-मानसून से पहले ही रेवाड़ी में जलभराव का खतरा, गंदगी से पटे नालों ने बढ़ाई चिंता

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रेवाड़ी। प्री-मानसून की दस्तक से पहले ही रेवाड़ी शहर में जलभराव की आशंका गहराने लगी है। शहर के विभिन्न इलाकों में बरसाती और सीवरेज नालों की सफाई समय पर नहीं होने के कारण हालात चिंताजनक बने हुए हैं। मुख्य बाजारों, सड़कों और रिहायशी क्षेत्रों में बने कई नाले गाद, प्लास्टिक और कचरे से पूरी तरह अटे पड़े हैं। ऐसे में हल्की बारिश के दौरान भी शहर के कई हिस्सों में पानी भरने की आशंका बढ़ गई है।

हर साल मानसून के दौरान जलभराव की समस्या से जूझने वाले रेवाड़ी में इस बार भी प्रशासनिक लापरवाही साफ दिखाई दे रही है। उपायुक्त द्वारा मानसून से पहले सभी नालों की सफाई कराने के निर्देश दिए जा चुके हैं, लेकिन नगर परिषद की ओर से अब तक कई नालों की सफाई के लिए टेंडर प्रक्रिया तक पूरी नहीं की गई है। शहर में छोटे-बड़े दस से अधिक नाले हैं, जिनमें से कई की हालत बेहद खराब बनी हुई है।

पिछले कुछ वर्षों से स्थिति यह रही है कि केवल 10 एमएम बारिश होते ही शहर के कई इलाके पानी में डूब जाते हैं। जलभराव के कारण न केवल लोगों का आवागमन प्रभावित होता है, बल्कि सड़क हादसों का खतरा भी बढ़ जाता है। कई स्थानों पर नालों के ऊपर हुए अतिक्रमण भी पानी की निकासी में बड़ी बाधा बन रहे हैं। गढ़ी बोलनी रोड और मिनी बाईपास क्षेत्र के नालों में जमा गंदगी हालात की गंभीरता को साफ दर्शा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते नालों की सफाई और मरम्मत नहीं कराई गई तो मानसून के दौरान हालात और बिगड़ सकते हैं। जलभराव के चलते डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से जल्द सफाई अभियान चलाने और लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।

नगर परिषद अधिकारियों का कहना है कि मानसून से पहले सभी नालों की सफाई और मरम्मत का कार्य पूरा कर लिया जाएगा। कुछ नालों के टेंडर जारी किए जा चुके हैं, जबकि बाकी प्रक्रिया भी जल्द पूरी होने का दावा किया जा रहा है। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि इस बार मानसून के दौरान शहर में जलभराव की स्थिति नहीं बनने दी जाएगी।

 

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