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ओमप्रकाश चौटाला की फोटो को लेकर इनैलो-जजपा में टकराव तेज, कानूनी लड़ाई के संकेत

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चंडीगढ़ | हरियाणा की राजनीति में एक बार फिर तस्वीर को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। स्वर्गीय पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला की तस्वीर को लेकर इंडियन नेशनल लोकदल (इनैलो) और जननायक जनता पार्टी (जजपा) आमने-सामने आ गई हैं। जजपा की ओर से पार्टी पोस्टरों पर चौटाला की फोटो लगाने की घोषणा के बाद इनैलो ने इसका विरोध करते हुए इसे ‘गैरकानूनी और अनैतिक’ बताया है।

विवाद की पृष्ठभूमि

जजपा के गठन के बाद से ही दोनों दलों के बीच मतभेद रहे हैं, लेकिन हाल ही में रोहतक में जजपा प्रमुख अजय सिंह चौटाला द्वारा स्व. ओमप्रकाश चौटाला की तस्वीर पार्टी पोस्टर पर लगाने की घोषणा के बाद यह टकराव सार्वजनिक रूप से सामने आ गया है।

इनैलो की चेतावनी: कानूनी कार्रवाई के लिए तैयार

इनैलो नेता अभय सिंह चौटाला ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि यदि जजपा ऐसा कदम उठाती है, तो वे पहले केंद्रीय चुनाव आयोग और फिर जरूरत पड़ी तो सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे। उन्होंने इसे “राजनीतिक विरासत की चोरी” करार देते हुए कहा कि जजपा के पास चौटाला की तस्वीर के उपयोग का कोई नैतिक या कानूनी अधिकार नहीं है।

राजनीतिक उदाहरणों का हवाला

अभय चौटाला ने अजीत पवार-शरद पवार विवाद और देवीलाल-बंसीलाल से जुड़े राजनीतिक प्रसंगों का हवाला देते हुए कहा कि जब किसी नेता की पहचान एक पार्टी से हो, तो दूसरी पार्टी उसका नाम या तस्वीर अपने प्रचार में नहीं इस्तेमाल कर सकती।

जजपा की दलील: चौटाला सभी के हैं, कि किसी एक के

पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने जवाबी बयान में कहा कि ओमप्रकाश चौटाला केवल इनैलो के नहीं बल्कि पूरे परिवार और हरियाणा की राजनीति के वरिष्ठ स्तंभ रहे हैं। उन्होंने कहा, “अब जब वे इनैलो के अध्यक्ष नहीं हैं और इस दुनिया में नहीं हैं, तो हम उन्हें सम्मान देने के लिए उनकी तस्वीर अपने पोस्टरों पर लगा सकते हैं।”

निजी टिप्पणियों में तब्दील हुआ विवाद

राजनीतिक बहस व्यक्तिगत कटाक्ष तक पहुंच गई है। अभय सिंह चौटाला द्वारा जजपा नेताओं को “गद्दार” कहे जाने के बाद अजय चौटाला ने भी पलटवार किया। दोनों नेताओं के बीच ‘जूते के नंबर’ को लेकर की गई टिप्पणी सोशल मीडिया पर भी वायरल हो गई है।

राजनीतिक विश्लेषण

विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद आगामी चुनावों के मद्देनज़र दोनों दलों की स्थिति मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। ओमप्रकाश चौटाला का नाम अब भी राज्य की राजनीति में प्रभाव रखता है और यही वजह है कि दोनों पक्ष उनके नाम और विरासत को अपने पक्ष में दिखाने की कोशिश कर रहे हैं।

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