चंडीगढ़। सरकारी अस्पतालों में शवों के सम्मानजनक संरक्षण को लेकर सामने आ रही लापरवाही पर हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने राज्य के सभी संबंधित मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (सीएमओ) को निर्देश दिए हैं कि शवगृहों में स्थापित फ्रीजर चैंबरों का नियमित निरीक्षण सुनिश्चित किया जाए और सभी उपकरण हर समय सुचारु रूप से संचालित रहें।
यह निर्देश आयोग के सदस्य दीप भाटिया ने सोनीपत और फरीदाबाद से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान संबंधित अधिकारियों से प्राप्त रिपोर्टों की समीक्षा के बाद जारी किए। आयोग ने स्पष्ट किया कि शवों के संरक्षण में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सोनीपत से जुड़े मामले में एक परिवार ने शिकायत दर्ज कराई थी कि पोस्टमार्टम के दौरान शव को पर्याप्त फ्रीजर सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई, जिससे शव के संरक्षण में लापरवाही हुई और परिजनों को मानसिक पीड़ा का सामना करना पड़ा।
वहीं, फरीदाबाद के बीके सिविल अस्पताल की रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि शव संरक्षण के लिए उपलब्ध 14 फ्रीजर चैंबरों में से केवल 10 ही कार्यरत हैं, जबकि चार लंबे समय से बंद पड़े हैं। दूसरी ओर, सोनीपत सिविल अस्पताल प्रशासन ने आयोग को बताया कि वहां आठ डीप फ्रीजर उपलब्ध हैं।
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि मृतकों की गरिमा और सम्मान बनाए रखना केवल मानवीय संवेदनशीलता का विषय नहीं, बल्कि स्वास्थ्य संस्थानों की कानूनी जिम्मेदारी भी है। इसलिए सभी सरकारी अस्पतालों को शवगृहों की व्यवस्थाओं को दुरुस्त रखने, फ्रीजर चैंबरों का नियमित रखरखाव करने और किसी भी तकनीकी खराबी को तुरंत दूर करने के निर्देश दिए गए हैं।
हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में यदि किसी अस्पताल में शव संरक्षण से संबंधित लापरवाही या शवगृह की अव्यवस्था सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। आयोग ने सभी अस्पतालों से शवगृहों की व्यवस्थाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देने और समय-समय पर निरीक्षण रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा है।







