हिसार। हरियाणा के बहादुरगढ़ में जिम संचालक कपिल रेढ़ू हत्याकांड के दो आरोपियों प्रवेश और हिमांशु के पुलिस एनकाउंटर को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। दोनों के परिजनों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे फर्जी एनकाउंटर बताया है। उनका आरोप है कि दोनों युवकों को पहले हिरासत में लिया गया था और बाद में साजिश के तहत मुठभेड़ दिखाकर मार दिया गया। वहीं, पुलिस ने अभी तक अपने आधिकारिक बयान में एनकाउंटर को वैध कार्रवाई बताया है।
हिसार के टिब्बा दानाशेर निवासी प्रवेश के पिता जयप्रकाश का कहना है कि कपिल रेढ़ू हत्याकांड के दिन पुलिस उनके घर पहुंची थी और प्रवेश की तस्वीर व मोबाइल फोन अपने साथ ले गई थी। उनका दावा है कि इसके बाद से प्रवेश घर नहीं लौटा। उन्हें सूचना मिली कि बहादुरगढ़ में पुलिस मुठभेड़ के दौरान उसकी मौत हो गई। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि पुलिस के अनुसार प्रवेश की लोकेशन महाराष्ट्र के पुणे तक ट्रेस की गई थी, तो उसे वहां से पकड़ने के बाद बहादुरगढ़ में एनकाउंटर कैसे हुआ।
जयप्रकाश ने यह भी आरोप लगाया कि उनके बेटे को दिल, सीने और पैर में गोलियां लगी थीं। उनका कहना है कि पुलिस का दावा और घटनास्थल की परिस्थितियां मेल नहीं खातीं। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
दूसरी ओर, जाखोदखेड़ा निवासी हिमांशु के पिता सुशील कुमार ने भी पुलिस कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने बताया कि घटना वाले दिन पुलिस उन्हें पूछताछ के लिए साथ ले गई थी और कहा था कि हिमांशु की कपिल रेढ़ू हत्याकांड में शामिल एक शूटर से बातचीत हुई थी। उनका कहना है कि यदि हिमांशु केवल संपर्क में था और शूटर नहीं था, तो उसका एनकाउंटर क्यों किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि हिमांशु के शरीर पर लगी गोलियों के निशान पुलिस के दावे पर संदेह पैदा करते हैं।
सुशील कुमार ने बताया कि हिमांशु एक कुश्ती खिलाड़ी था और उसकी पहचान प्रवेश से खेल प्रतियोगिताओं के दौरान हुई थी। उनके अनुसार प्रवेश, हिमांशु को यह कहकर अपने साथ ले गया था कि उसकी बहन के रिश्ते के लिए लड़के वाले आने वाले हैं। इसके बाद से वह घर नहीं लौटा और बाद परिवार का उससे कोई संपर्क नहीं हो पाया। उसकी मौत की सूचना मिलने के बाद सोमवार सुबह अंतिम संस्कार कर दिया गया।
इस बीच, कपिल रेढ़ू हत्याकांड का कथित मुख्य साजिशकर्ता और विदेश में बैठा लॉरेंस गैंग से जुड़ा सुंदर टकला भी इस मामले में सामने आया है। उसने व्हाट्सएप संदेश जारी कर बहादुरगढ़ एनकाउंटर को फर्जी करार दिया है। संदेश में दावा किया गया है कि पुलिस ने दोनों युवकों को पहले ही केरल से हिरासत में ले लिया था और उसके पास इससे संबंधित सीसीटीवी फुटेज मौजूद है। उसने यह भी आरोप लगाया कि मारे गए युवकों के पास कोई हथियार नहीं था और हत्या में इस्तेमाल हथियार पहले से पुलिस के कब्जे में था।
सुंदर टकला ने संदेश में पुलिस को चुनौती देते हुए कहा कि उसके पास अपने दावों के समर्थन में सबूत हैं। साथ ही उसने धमकी भरे अंदाज में कहा कि वह आगे किसी को नहीं छोड़ेगा। यह संदेश रविवार देर रात सोशल मीडिया के कई प्लेटफॉर्म पर वायरल हुआ। बताया जा रहा है कि संदेश ऑस्ट्रेलिया के एक नंबर से प्रसारित किया गया।
फिलहाल पुलिस की ओर से परिजनों और सुंदर टकला के आरोपों पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामले को लेकर जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी है।







