झज्जर। हरियाणा के झज्जर जिले का राजकीय माध्यमिक विद्यालय निमाना शिक्षा और खेल के क्षेत्र में एक नई मिसाल कायम कर रहा है। यह प्रदेश का पहला ऐसा सरकारी विद्यालय बन गया है, जहां विद्यार्थियों को नियमित पढ़ाई के साथ घुड़सवारी का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य बच्चों के शारीरिक, मानसिक और नेतृत्व कौशल को विकसित करना है।
पिछले करीब एक महीने से विद्यालय परिसर में घुड़सवारी की विशेष कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। इनमें लगभग 50 छात्र-छात्राएं उत्साहपूर्वक हिस्सा ले रहे हैं। प्रशिक्षण के दौरान बच्चों को घोड़े पर संतुलन बनाना, सुरक्षित ढंग से चढ़ना-उतरना, लगाम नियंत्रित करना और अनुशासित तरीके से घुड़सवारी करना सिखाया जा रहा है। विद्यालय में उपलब्ध दो घोड़ियों के माध्यम से यह प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जबकि अनुभवी प्रशिक्षक अरुण शास्त्री सहित दो प्रशिक्षक विद्यार्थियों को नियमित रूप से मार्गदर्शन दे रहे हैं।
विद्यालय प्रबंधन का मानना है कि घुड़सवारी केवल एक खेल नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, अनुशासन, साहस और नेतृत्व क्षमता विकसित करने का प्रभावी माध्यम है। यही कारण है कि विद्यार्थियों में इस गतिविधि को लेकर खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।
इस अभिनव पहल के पीछे गोकुलधाम महातीर्थ गौशाला के संचालक एवं समाजसेवी सुनील निमाना का विशेष योगदान है। उनके सहयोग से विद्यालय में घुड़सवारी प्रशिक्षण शुरू किया गया। सुनील निमाना का कहना है कि बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए केवल किताबों का ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि खेल और रचनात्मक गतिविधियां भी उतनी ही आवश्यक हैं।
विद्यालय के मुख्य अध्यापक विक्रम ने बताया कि आसपास के नौ गांवों के विद्यार्थी यहां शिक्षा ग्रहण करने आते हैं। बढ़ती छात्र संख्या को देखते हुए विद्यालय में करीब 1.25 करोड़ रुपये की लागत से आठ नए साउंड प्रूफ और वातानुकूलित कमरों का निर्माण भी किया जा रहा है। इसके अलावा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए निजी स्तर पर लगभग 20 शिक्षकों का वेतन भी वहन किया जा रहा है।
शिक्षा, खेल और सामाजिक सहयोग के इस समन्वित मॉडल की क्षेत्र में व्यापक सराहना हो रही है। अभिभावकों का मानना है कि इस तरह की पहल सरकारी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के साथ बच्चों के समग्र विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।







